भ. गी. 16.9
एतां दृष्टिमवष्टभ्य नष्टात्मानोऽल्पबुद्धयः ।
प्रभवन्त्युग्रकर्माणः क्षयाय जगतोऽहिताः ॥
प्रभवन्त्युग्रकर्माणः क्षयाय जगतोऽहिताः ॥
अनुवाद
इस मत को धारण करने वाले ऐसे वैरी लोग, जो आत्मबोध से रहित, अल्पविवेकी और क्रूर कर्म करने वाले हैं, केवल जगत् के विनाश के लिए जन्म लेते हैं।