भ. गी. 16.11

चिन्तामपरिमेयां च प्रलयान्तामुपाश्रिताः ।
कामोपभोगपरमा एतावदिति निश्चिताः ॥

अनुवाद

मृत्यु तक बनी रहने वाली अपरिमित चिन्ताओं के वश में होकर वे [इस धारणा में] दृढ़ रहते हैं कि इन्द्रिय-सुखों का भोग ही परम लक्ष्य है।

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