भ. गी. 1.27ख-28क

तान्समीक्ष्य स कौन्तेयः सर्वान्बन्धूनवस्थितान् ॥
कृपया परयाविष्टो विषीदन्निदमब्रवीत् ।

अनुवाद

कुन्तीपुत्र इन सब सम्बन्धियों को युद्धभूमि में अवस्थित देखकर अत्यन्त कृपा से आविष्ट हो गये और विषाद - भाव से ये वचन बोले ।

टिप्पणियाँ

इन दो पङ्क्तियों में से दूसरी और निम्नलिखित तीन पङ्क्तियों में से प्रथम पङ्क्ति से श्लोक संख्या २८ बनती है । .

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प्रश्न 1, कुल 2

व्याख्यान के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन के रथ को भीष्म और द्रोणाचार्य के ठीक सामने स्थापित करके "इन एकत्रित कौरवों को देखो" कहने का क्या सूक्ष्म और गहरा आध्यात्मिक उद्देश्य था?

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