भ. गी. 1.10
पर्याप्तं त्विदमेतेषां बलं भीमाभिरक्षितम् ॥
अनुवाद
भीष्म द्वारा पूर्णतः सुरक्षित हमारी सेना की शक्ति अपरिमेय* है, जबकि भीम द्वारा पूर्णतः सुरक्षित उनकी सेना की शक्ति सीमित है।
टिप्पणियाँ
* इस शब्द का अर्थ “अपर्याप्त” भी हो सकता है।
भीष्म द्वारा पूर्णतः सुरक्षित हमारी सेना की शक्ति अपरिमेय* है, जबकि भीम द्वारा पूर्णतः सुरक्षित उनकी सेना की शक्ति सीमित है।
* इस शब्द का अर्थ “अपर्याप्त” भी हो सकता है।
आपका उत्तर सही है।
आपका उत्तर गलत है।
विकल्प क (गलत): 'त्यक्तजीविताः' का अर्थ अमर होना नहीं बल्कि प्राण त्याग देना या मृतप्राय होना है। इसके अतिरिक्त, अस्त्र और शस्त्र की परिभाषाएँ इसमें विपरीत दी गई हैं, क्योंकि हाथ में पकड़कर लड़े जाने वाले हथियार शस्त्र होते हैं, अस्त्र नहीं।
विकल्प ख (सही): वक्ता बताते हैं कि 'त्यक्तजीविताः' का शाब्दिक अर्थ 'प्राण छोड़ चुके' होता है, जो दुर्योधन के मुख से निकला एक अनिष्टकारी व नकारात्मक शब्द था, जबकि शूरवीरों के लिए 'जिगीषवः' (विजय की इच्छा रखने वाले) शब्द उचित होता। साथ ही, संस्कृत पारिभाषिक नियम के अनुसार दूर फेंककर मारे जाने वाले साधन (जैसे तीर या भाला) 'अस्त्र' हैं और हाथ में धारण करके लड़े जाने वाले साधन (जैसे तलवार या गदा) 'शस्त्र' हैं।
आपका उत्तर सही है।
आपका उत्तर गलत है।
विकल्प क (गलत): 'अपर्याप्तम्' का अर्थ पांडवों की पराजय निश्चित होना नहीं है। इसके साथ ही, भीष्म द्वारा किया गया यह शंखनाद युद्ध की औपचारिक शुरुआत नहीं था, क्योंकि वास्तविक युद्ध तो श्री भगवान द्वारा गीता का उपदेश देने और अर्जुन द्वारा पुनः धनुष उठाने के बाद ही आरंभ होता है।
विकल्प ख (सही): व्याख्यान के अनुसार दुर्योधन ने चतुर कूटनीति से द्विअर्थक शब्द 'अपर्याप्तम्' का प्रयोग किया ताकि द्रोणाचार्य समझें कि सेना अपूर्ण है और वे पूरी शक्ति से लड़ें, जबकि भीष्म इसका अर्थ 'असीमित' समझें ताकि उनका अपमान न हो। भीष्म ने दुर्योधन की हताशा को ताड़कर केवल उसका उत्साह और हर्ष बढ़ाने हेतु सिंहनाद व शंखध्वनि की थी, युद्ध आरंभ करने के लिए नहीं।
✓ आपकी प्रोफ़ाइल में सहेजा गया। अपनी प्रगति और बैज देखें
अपनी प्रगति सहेजने और बैज पाने के लिए साइन इन करें। Sign In
ये पहले पूछे गए प्रश्न शायद आपके प्रश्न का उत्तर दे चुके हैं:
इस श्लोक पर पहला प्रश्न पूछें।